“सरकार ने कोकिंग कोल को क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल का दर्जा देकर स्टील इंडस्ट्री की सप्लाई चेन मजबूत करने का कदम उठाया है, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और विदेशी निर्भरता घटेगी। Coal India और BCCL जैसे कंपनियों के शेयरों में 3-5% की तेजी आई, जबकि भारत में 37.37 बिलियन टन रिजर्व मौजूद हैं। यह फैसला माइनिंग अप्रूवल्स को तेज करेगा और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बूस्ट देगा।”
सरकार ने Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 के तहत कोकिंग कोल को क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल की कैटेगरी में शामिल किया है। इससे माइनिंग एक्टिविटी में तेजी आएगी, डीप-सीटेड डिपॉजिट्स की एक्सप्लोरेशन आसान होगी और स्टील सेक्टर की रॉ मटेरियल सप्लाई सुरक्षित बनेगी। NITI Aayog की सिफारिशों और Viksit Bharat गोल्स पर आधारित यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण है।
कोकिंग कोल स्टील प्रोडक्शन में मुख्य रॉ मटेरियल है, जो ब्लास्ट फर्नेस में कोक बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। भारत में स्टील इंडस्ट्री की ग्रोथ तेज है, लेकिन 95% कोकिंग कोल आयात पर निर्भर है, जिससे विदेशी मुद्रा का बड़ा नुकसान होता है। इस दर्जे से प्राइवेट प्लेयर्स को माइनिंग ब्लॉक्स ऑक्शन में आसानी मिलेगी और पर्यावरण क्लियरेंस प्रोसेस स्पीड अप होगा।
शेयर बाजार में इस ऐलान का असर तुरंत दिखा। Coal India के शेयर 3% बढ़कर ₹456.95 पर पहुंचे, जबकि Bharat Coking Coal Limited (BCCL) के शेयरों में 5% की तेजी आई और ये ₹39 पर ट्रेड हुए। निवेशक इस फैसले को पॉजिटिव मान रहे हैं, क्योंकि इससे घरेलू प्रोडक्शन बढ़ने की उम्मीद है और स्टील कंपनियों जैसे JSW Steel या Tata Steel को सस्ता रॉ मटेरियल मिल सकता है।
भारत में कोकिंग कोल के रिजर्व मुख्य रूप से झारखंड में हैं, जहां 37.37 बिलियन टन संसाधन अनुमानित हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी रिजर्व मौजूद हैं। लेकिन घरेलू प्रोडक्शन कम होने से आयात बढ़ रहा है।
नीचे आयात डेटा की टेबल दी गई है, जो ट्रेंड दिखाती है:
| वित्तीय वर्ष | आयात मात्रा (मिलियन टन) | अनुमानित लागत (₹ करोड़) |
|---|---|---|
| FY21 | 51.20 | 1,20,000 |
| FY22 | 52.50 | 1,30,000 |
| FY23 | 54.80 | 1,40,000 |
| FY24 | 56.20 | 1,45,000 |
| FY25 | 57.58 | 1,50,000 |
यह डेटा दर्शाता है कि आयात में सालाना 5-7% की बढ़ोतरी हो रही है, मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और रूस से। क्रिटिकल मिनरल स्टेटस से घरेलू वॉशरीज और ब्लेंडिंग फैसिलिटी में निवेश बढ़ेगा, जिससे हाई ऐश कंटेंट वाली लोकल कोल को स्टील-ग्रेड में कन्वर्ट करना आसान होगा।
क्रिटिकल मिनरल का दर्जा क्या मायने रखता है? यहां मुख्य पॉइंट्स:
फास्टर अप्रूवल्स : माइनिंग लीज और एक्सप्लोरेशन के लिए सरकारी क्लियरेंस में देरी कम होगी, जो पहले 2-3 साल लगती थी।
प्राइवेट पार्टिसिपेशन : FDI और जॉइंट वेंचर्स को बढ़ावा मिलेगा, जैसे कि ऑस्ट्रेलियाई कंपनियां लोकल माइंस में पार्टनरशिप कर सकती हैं।
सप्लाई चेन रेजिलिएंस : स्टील इंडस्ट्री को ग्लोबल प्राइस फ्लक्चुएशंस से बचाव मिलेगा, क्योंकि लोकल प्रोडक्शन 20-30% बढ़ सकता है।
इकोनॉमिक इम्पैक्ट : स्टील प्रोडक्शन कॉस्ट में 10-15% की बचत हो सकती है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे रोड्स और ब्रिजेस को सस्ता बनाएगी।
एनवायरनमेंटल बेनिफिट्स : लोकल माइनिंग से ट्रांसपोर्टेशन एमिशन्स कम होंगे, लेकिन सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज जैसे जीरो-लिक्विड डिस्चार्ज को अपनाना जरूरी होगा।
National Steel Policy के तहत यह कदम स्टील प्रोडक्शन को 300 मिलियन टन तक ले जाने में मदद करेगा। कोकिंग कोल की क्वालिटी इश्यूज, जैसे हाई ऐश (25-35%) और सल्फर लेवल, को नए टेक्नोलॉजी से सॉल्व किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, हेवी मीडिया साइक्लोन्स और फ्लोटेशन कॉलम्स का इस्तेमाल वॉश्ड कोल प्रोडक्शन बढ़ाएगा।
कोयला सेक्टर में रिफॉर्म्स की बात करें तो, कोकिंग कोल को अब Part D में शामिल किया गया है, जहां पहले सिर्फ कोल था। इससे स्पेशल पॉलिसी सपोर्ट मिलेगा, जैसे सब्सिडी ऑन इक्विपमेंट और रिसर्च फंडिंग। स्टील मेकर्स को ब्लेंडिंग ऑप्शंस मिलेंगे, जहां लोकल कोल को इंपोर्टेड के साथ मिक्स करके यूज किया जा सकेगा।
शेयर मार्केट एनालिसिस से पता चलता है कि यह फैसला लॉन्ग-टर्म ग्रोथ ट्रिगर करेगा। Coal India की सब्सिडियरी BCCL, जो मुख्य रूप से कोकिंग कोल प्रोड्यूस करती है, को सबसे ज्यादा फायदा होगा। उसके प्रोडक्शन टारगेट 10% बढ़ सकते हैं, जबकि ओवरऑल कोयला इंडस्ट्री में 15-20% इन्वेस्टमेंट फ्लो आ सकता है।
झारखंड के जहरिया कोलफील्ड्स में चैलेंजेज जैसे अंडरग्राउंड फायर और लैंड सब्सिडेंस को हैंडल करने के लिए स्पेशल फंड्स अलोकेट किए जा सकते हैं। इससे कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन और सेफ माइनिंग सुनिश्चित होगी।
ओवरऑल, यह दर्जा मिनरल सिक्योरिटी को मजबूत करेगा और स्टील एक्सपोर्ट्स को बूस्ट देगा, क्योंकि ग्लोबल मार्केट में इंडियन स्टील कॉम्पिटिटिव बनेगा। प्राइवेट कंपनियां जैसे Adani Enterprises या Vedanta भी नए ब्लॉक्स में एंटर कर सकती हैं, जो इंडस्ट्री को डायवर्सिफाई करेगा।
Disclaimer: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई रिपोर्ट, न्यूज और टिप्स सामान्य प्रकृति की हैं और निवेश सलाह नहीं मानी जानी चाहिए। स्रोत विश्वसनीय हैं, लेकिन कोई गारंटी नहीं दी जाती।