भारत और यूरोपीय संघ ने 18 वर्षों की लंबी वार्ता के बाद 27 जनवरी 2026 को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा की। पीएम मोदी ने इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा एफटीए बताया, जबकि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया। यह समझौता 2 अरब लोगों के बाजार को जोड़ेगा, जो वैश्विक जीडीपी का करीब 25% और व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा है। समझौते से भारतीय निर्यातकों को 99% से अधिक लाइन पर रियायती पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय उत्पादों पर 96.6% टैरिफ कम या खत्म होंगे। इससे दोनों पक्षों में लाखों नौकरियां सृजित होंगी, निवेश बढ़ेगा और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: सभी प्रमुख पहलू
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की औपचारिक घोषणा ने वैश्विक व्यापार में नया अध्याय जोड़ दिया है। यह समझौता 2007 में शुरू हुई वार्ताओं का परिणाम है, जो 2013 में स्थगित होने के बाद 2022 में फिर शुरू हुईं। अक्टूबर 2025 में अंतिम दौर की बातचीत पूरी होने के बाद 27 जनवरी 2026 को दोनों पक्षों ने इसे अंतिम रूप दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह सिर्फ व्यापार समझौता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट है। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है, जो यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ जुड़ेगा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया और कहा कि इससे इतिहास रचा गया है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने इसे 2 अरब लोगों के बाजार के लिए सबसे महत्वाकांक्षी समझौता करार दिया।
समझौते का दायरा और टैरिफ में कटौती
यह समझौता वस्तुओं, सेवाओं, बौद्धिक संपदा, सतत विकास और छोटे-मध्यम उद्यमों (एसएमई) को कवर करता है। भौगोलिक संकेतकों (जीआई) और निवेश संरक्षण पर अलग वार्ताएं जारी हैं।
भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में 99% से अधिक टैरिफ लाइनों पर रियायती पहुंच मिलेगी, जिसमें व्यापार मूल्य का 99.5% कवर होगा।
यूरोपीय निर्यातकों को भारत में 96.6% वस्तुओं पर टैरिफ खत्म या कम होंगे।
अधिकांश टैरिफ तत्काल या चरणबद्ध तरीके से खत्म होंगे, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों जैसे बीफ, चिकन, चावल और चीनी पर कोई छूट नहीं।
प्रमुख क्षेत्रों में टैरिफ कटौती की जानकारी
| क्षेत्र | वर्तमान टैरिफ (भारत में) | नई व्यवस्था | प्रभावित निर्यात मूल्य (यूरोपीय) |
|---|---|---|---|
| ऑटोमोबाइल | 110% तक | 10% तक कम, 2.5 लाख वाहनों पर कोटा | €1.6 बिलियन |
| मशीनरी और इलेक्ट्रिकल उपकरण | 44% तक | ज्यादातर 0% | €16.3 बिलियन |
| रसायन | 22% तक | ज्यादातर 0% | €3.2 बिलियन |
| फार्मास्यूटिकल्स | 11% तक | 0% | €1.1 बिलियन |
| वाइन | 150% तक | 20-30% तक कम | महत्वपूर्ण |
| ऑलिव ऑयल | 45% तक | 0% (5 वर्षों में) | महत्वपूर्ण |
| प्रोसेस्ड फूड (बिस्किट, चॉकलेट आदि) | 50% तक | 0% | महत्वपूर्ण |
भारतीय पक्ष से टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, फुटवियर और केमिकल्स जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टरों को बड़ा फायदा होगा। इनमें से €33 बिलियन के निर्यात को शून्य ड्यूटी मिलेगी।
सेवा क्षेत्र और मोबिलिटी प्रावधान
भारत को यूरोपीय संघ के 144 सब-सेक्टर्स में पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय कंपनियों को भारत के 102 सब-सेक्टर्स में। फाइनेंशियल सर्विसेज में भारत ने अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धताएं दी हैं। आईटी, आईटीईएस, प्रोफेशनल सर्विसेज और एजुकेशन में भारतीय निर्यात बढ़ेंगे।
मोबिलिटी फ्रेमवर्क से शॉर्ट-टर्म बिजनेस ट्रैवल, इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफर और कॉन्ट्रैक्टुअल सर्विस सप्लायर्स को आसानी होगी। डिपेंडेंट्स के लिए वर्किंग राइट्स और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट्स पर 5 वर्षों में काम होगा। भारतीय ट्रेडिशनल मेडिसिन प्रैक्टिशनर्स को भी अवसर मिलेंगे।
आर्थिक प्रभाव और लाभ
द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में €180 बिलियन से अधिक है, जिसमें भारत के निर्यात €75.85 बिलियन और आयात €60.68 बिलियन हैं। समझौते से यूरोपीय निर्यात 2032 तक दोगुना होने की उम्मीद है। भारत में एमएसएमई, महिलाएं, कारीगर और युवा पेशेवरों के लिए लाखों नौकरियां सृजित होंगी।
यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देगा, ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की स्थिति सुधारेगा और यूरोपीय टेक्नोलॉजी-कैपिटल से भारतीय स्किल्स का संयोजन करेगा। उपभोक्ताओं को सस्ती लग्जरी कारें (बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज), वाइन और हाई-टेक उत्पाद मिलेंगे।
वैश्विक संदर्भ में महत्व
ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों के बीच यह समझौता रूल्स-बेस्ड ट्रेड को मजबूत करेगा। यह भारत की यूके, ईएफटीए, ऑस्ट्रेलिया और यूएई जैसे अन्य समझौतों के साथ संतुलन बनाएगा। जलवायु सहयोग के लिए €500 मिलियन का ईयू सपोर्ट और ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स जैसे प्रावधान सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देंगे।
डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट है तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। यह निवेश या कानूनी सलाह नहीं है।