केंद्र सरकार की नई सहकारी पहल ‘भारत टैक्सी’ में कैब और ऑटो ड्राइवर मात्र 500 रुपये निवेश कर कंपनी के सह-मालिक बन सकते हैं। पहले तीन साल कंपनी के विस्तार पर खर्च होंगे, उसके बाद मुनाफे का 80% हिस्सा ड्राइवरों (सारथियों) को किलोमीटर आधार पर मिलेगा, जबकि 20% पूंजी के रूप में कंपनी में रहेगा। यह मॉडल ओला-उबर जैसी कंपनियों को टक्कर देने के साथ ड्राइवरों को सम्मानजनक आय और स्वामित्व का अवसर देता है।
भारत टैक्सी में ₹500 निवेश से पार्टनर बनने का मौका, 80% मुनाफा सारथियों का
केंद्र सरकार ने ‘भारत टैक्सी’ नाम से एक क्रांतिकारी सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जो ड्राइवरों को पारंपरिक एग्रीगेटर मॉडल से मुक्ति दिलाने का वादा करता है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में सारथियों से बातचीत के दौरान इस मॉडल की पूरी जानकारी दी।
यह प्लेटफॉर्म पांच बड़ी सहकारी संस्थाओं के सहयोग से बनाया गया है और इसे मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 के तहत रजिस्टर किया गया है। ड्राइवरों को ‘सारथी’ कहा जा रहा है, जो कंपनी के असली मालिक होंगे।
कैसे बनें पार्टनर?
मात्र ₹500 का एक शेयर खरीदकर कोई भी सारथी कंपनी का सह-मालिक बन सकता है।
जैसे-जैसे सारथियों की संख्या बढ़ेगी, अधिक लोग इस अवसर का लाभ उठा सकेंगे।
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में सारथियों के प्रतिनिधियों को जगह मिलेगी, जिससे उनकी आवाज निर्णयों में सुनी जाएगी।
आय कैसे बंटेगी? शुरुआती दौर में सारथी तय बेस किराए पर कमाई करेंगे, जिसमें कोई कमीशन नहीं काटा जाएगा। कंपनी की कुल कमाई का 20% सारथियों की पूंजी के रूप में भारत टैक्सी के खाते में जमा होगा, जबकि 80% पैसा टैक्सी द्वारा तय किए गए किलोमीटर के आधार पर सारथियों के खाते में वापस जाएगा।
पहले तीन साल कंपनी के विस्तार, अधिक शहरों में पहुंच और बुनियादी ढांचे पर फोकस रहेंगे। इस दौरान मुनाफा मुख्य रूप से री-इन्वेस्ट होगा। तीन साल बाद जब कंपनी स्थिर हो जाएगी, तब कुल मुनाफे का 20% कंपनी की पूंजी में रहेगा और 80% सारथियों में बांटा जाएगा।
उदाहरण के तौर पर अमित शाह ने बताया कि यदि तीन साल बाद कंपनी 25 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाती है, तो 5 करोड़ रुपये (20%) पूंजी के रूप में रहेंगे और 20 करोड़ रुपये (80%) सारथियों को उनके प्रदर्शन (किलोमीटर) के आधार पर वितरित किए जाएंगे।
अन्य प्रमुख विशेषताएं
जीरो कमीशन मॉडल : शुरुआत में कोई कमीशन नहीं, पूरा किराया ड्राइवर को मिलता है।
फिक्स्ड बेस फेयर : सर्ज चार्ज या छिपे शुल्क नहीं, पारदर्शी कमाई।
महिला सशक्तिकरण : ‘बाइक दीदी’ जैसी पहल से महिलाएं ड्राइवर बन रही हैं, 150 से अधिक महिलाएं पहले ही जुड़ चुकी हैं।
विस्तार लक्ष्य : दो साल में 15 करोड़ सारथियों को जोड़ने का लक्ष्य, तीन साल में सभी नगर निगम वाले शहरों में उपलब्धता।
वर्तमान स्थिति : फिलहाल दिल्ली-एनसीआर और राजकोट में संचालित, तीन लाख से अधिक ड्राइवर जुड़े, एक लाख से ज्यादा यूजर्स रजिस्टर्ड, रोजाना 10,000 से अधिक राइड्स पूरे हो रहे हैं।
लाभ क्यों महत्वपूर्ण? यह मॉडल ड्राइवरों को केवल कमाई देने वाला नहीं, बल्कि उन्हें मालिक बनाता है। अमूल की तरह छोटे योगदान से बड़ा सामूहिक लाभ बनाने की सोच पर आधारित है। ड्राइवरों को बीमा, सरकारी योजनाओं, लोन और सब्सिडी का लाभ भी मिलेगा।
यह योजना गिग वर्कर्स के लिए सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इच्छुक ड्राइवर भारत टैक्सी ऐप डाउनलोड कर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक घोषणाओं और बयानों पर आधारित है। निवेश से पहले आधिकारिक ऐप या सहकारी संस्था से पुष्टि करें।