“पुरानी दिल्ली की चांदनी चौक की संकरी गलियां सिर्फ मसालों और मिठाइयों की महक से नहीं भरी हैं, बल्कि यहां से निकली तीन छोटी दुकानों ने आज अरबों-खरबों के साम्राज्य खड़े कर दिए हैं। DS Group की इत्र की दुकान से लेकर Havells की इलेक्ट्रिकल ट्रेडिंग और Bikanervala की भुजिया स्टॉल तक—ये कहानियां मेहनत, विजन और भारतीय बाजार की समझ की मिसाल हैं।”
चांदनी चौक की तंग गलियों से निकले ये 3 बड़े बिजनेस
चांदनी चौक, पुरानी दिल्ली का दिल, सदियों से व्यापार का केंद्र रहा है। यहां की तंग गलियां जहां रोजाना लाखों का लेन-देन देखती हैं, वहीं कई कारोबारियों ने छोटी शुरुआत से विशाल साम्राज्य बनाए। आज हम तीन ऐसी कंपनियों की बात करेंगे जिनकी जड़ें चांदनी चौक की इन गलियों में हैं और जो अब देश-विदेश में मशहूर ब्रांड बन चुकी हैं।
1. DS Group: इत्र की छोटी दुकान से 10,000 करोड़ का FMCG साम्राज्य
1929 में धर्मपाल सत्यपाल ने चांदनी चौक में एक साधारण इत्र (परफ्यूम) की दुकान शुरू की। उस समय यह सिर्फ स्थानीय ग्राहकों के लिए खुशबू बेचने का काम था। लेकिन परिवार ने गुणवत्ता और नवाचार पर फोकस किया। धीरे-धीरे उन्होंने मुंह ताजा करने वाले उत्पादों में कदम रखा, जैसे राजनिगंधा पान मसाला।
1980 के दशक में कंपनी ने बड़ा पिवट लिया और Catch मसाले लॉन्च किए, जो नमक-मिर्च के शेकर्स से शुरू होकर स्पाइसेस, पैकेज्ड फूड और ड्रिंक्स तक पहुंच गए। आज DS Group भारत की टॉप 15 FMCG कंपनियों में शुमार है। इसका रेवेन्यू FY 2025 में 10,000 करोड़ रुपये पार कर चुका है, जिसमें फूड एंड बेवरेज से 42%, माउथ फ्रेशनर्स से 38% योगदान है। कंपनी का लक्ष्य 2029 तक, यानी 100 साल पूरे होने पर 20,000 करोड़ का टर्नओवर हासिल करना है। ब्रांड्स जैसे Catch, Pass Pass, Pulse, Rajnigandha, Silver Pearls और Ksheer आज हर भारतीय घर में पहुंच चुके हैं। यह कहानी बताती है कि पारंपरिक जड़ों को आधुनिक मार्केटिंग से कैसे जोड़ा जा सकता है।
2. Havells: भगिरथ प्लेस की इलेक्ट्रिकल दुकान से 80,000 करोड़ की मल्टीनेशनल कंपनी
1958 में हवेली राम गांधी ने चांदनी चौक के भगिरथ प्लेस में एक छोटी इलेक्ट्रिकल ट्रेडिंग दुकान शुरू की। शुरुआत में स्विचगियर और बेसिक इलेक्ट्रिकल सामान का व्यापार था। लेकिन 1971 में किमत राय गुप्ता ने इस ब्रांड को महज 7-10 लाख रुपये में खरीद लिया।
गुप्ता ने कंपनी को नए सिरे से बनाया। उन्होंने फैंस, लाइटिंग, केबल्स और अप्लायंसेज में विस्तार किया। Havells ने कई कंपनियों का अधिग्रहण किया, जैसे Towers and Transformers, ECS, Duke Amix, Standard Electricals और Crabtree India। आज यह भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिकल गुड्स कंपनी है, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 80,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। कंपनी अब ग्लोबल स्तर पर निर्यात करती है और ऊर्जा-कुशल उत्पादों पर फोकस कर रही है। यह उदाहरण है कि छोटी ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग और ब्रांड बिल्डिंग कैसे की जा सकती है।
3. Bikanervala: परांठे वाली गली की भुजिया स्टॉल से ग्लोबल रेस्टोरेंट चेन
1950 के दशक में अग्रवाल परिवार के भाइयों ने चांदनी चौक की परांठे वाली गली में Bikaner Bhujia Bhandar नाम से एक छोटी स्टॉल लगाई। वे बikaner से आकर पारंपरिक भुजिया, मिठाइयां और स्नैक्स बेचते थे। धीरे-धीरे यह Bikanervala ब्रांड में तब्दील हुआ।
आज कंपनी के भारत और विदेशों में 150 से ज्यादा आउटलेट्स हैं, जिसमें स्वीट्स, स्नैक्स, रेस्टोरेंट और कैफे शामिल हैं। यह नेपाल, USA, दुबई, सिंगापुर, न्यूजीलैंड जैसे देशों में मौजूद है। फ्रैंचाइजी मॉडल से तेज विस्तार हुआ और कंपनी ने भारतीय स्वाद को ग्लोबल स्तर पर पहुंचाया। Bikanervala अब न सिर्फ मिठाइयों के लिए, बल्कि फास्ट-कैजुअल डाइनिंग में भी जाना जाता है। यह दिखाता है कि पारंपरिक रेसिपी को आधुनिक रेस्टोरेंट चेन में कैसे बदला जा सकता है।
ये तीनों कहानियां साबित करती हैं कि चांदनी चौक की तंग गलियां सपनों की शुरुआत का ठिकाना हैं। छोटी पूंजी, मजबूत इरादा और बाजार की समझ से कोई भी बड़ा ब्रांड बन सकता है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध जानकारी और वर्तमान ट्रेंड्स पर आधारित है। बिजनेस संबंधी कोई निवेश सलाह नहीं है।