“अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीतियों को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया है। इसके बाद ट्रंप ने वैश्विक 10% टैरिफ लगाया, लेकिन भारत-US इंटरिम ट्रेड डील का फ्रेमवर्क बरकरार है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह बदलाव भारत के निर्यातकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, जहां प्रभावी टैरिफ औसतन 3% के आसपास रह सकता है, क्योंकि रेसिप्रोकल टैरिफ संरचना कमजोर पड़ गई है और MFN दरें लागू होंगी।”
अपने ही देश में ट्रंप को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ नीति रद्द की; क्या अब इंडिया-US ट्रेड डील पर नई शुरुआत होगी?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की प्रमुख टैरिफ नीतियों को सीमित कर दिया है। कोर्ट ने फैसला दिया कि peacetime में International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत व्यापक टैरिफ नहीं लगाए जा सकते। यह ट्रंप की रेसिप्रोकल टैरिफ रणनीति के लिए बड़ा झटका है, जिसके तहत भारत सहित कई देशों पर उच्च दरें लगाई गई थीं।
इस फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने Section 122 के तहत नया 10% वैश्विक टैरिफ लगाया, जो 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए प्रभावी होगा। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि जिन देशों के साथ ट्रेड डील फ्रेमवर्क बना है, जैसे भारत, वे भी अब इस 10% टैरिफ के दायरे में आएंगे। इससे पहले फरवरी की शुरुआत में भारत और अमेरिका के बीच इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट का फ्रेमवर्क घोषित हुआ था, जिसमें अमेरिका ने भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% करने और रूसी तेल खरीद से जुड़े 25% पेनल्टी टैरिफ हटाने का वादा किया था।
भारत ने बदले में अमेरिकी औद्योगिक सामानों और कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म या कम करने पर सहमति जताई थी। इसमें dried distillers’ grains, red sorghum, tree nuts, soybean oil, wine और spirits जैसे उत्पाद शामिल हैं। ट्रंप ने खुद कहा कि भारत-US डील “on track” है और “nothing changes”। उन्होंने पीएम मोदी के साथ संबंधों को “fantastic” बताया और कहा कि भारत टैरिफ देगा जबकि अमेरिका नहीं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रेसिप्रोकल टैरिफ फ्रेमवर्क की कानूनी वैधता कमजोर हो गई है। इससे भारत के निर्यात पर प्रभावी टैरिफ MFN (Most Favoured Nation) दरों के करीब आ सकता है, जो औसतन 3% के आसपास हैं। कुछ सेक्टर जैसे generic pharmaceuticals, gems and diamonds, aircraft parts पर पहले से ही टैरिफ जीरो या बहुत कम प्रस्तावित थे।
ट्रेड एक्सपर्ट्स के अनुसार:
टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर, फुटवियर जैसे सेक्टर जहां भारत का निर्यात मजबूत है, अब 10% टैरिफ के साथ बेहतर स्थिति में होंगे।
फार्मास्यूटिकल्स और precious stones पर पहले से राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।
भारत को अब डील के फाइनल टेक्स्ट पर बातचीत में मजबूत पोजिशन मिल सकती है, क्योंकि अमेरिका की टैरिफ पावर कम हुई है।
पिछले टैरिफ बदलावों की समयरेखा:
| तारीख | टैरिफ स्तर (भारत पर) | विवरण |
|---|---|---|
| अप्रैल 2025 | 10-26% | रेसिप्रोकल टैरिफ शुरू |
| अगस्त 2025 | 25% + पेनल्टी | रूसी तेल खरीद पर अतिरिक्त 25% |
| फरवरी 2026 (शुरुआत) | 18% | इंटरिम डील फ्रेमवर्क, पेनल्टी हटाई |
| फरवरी 2026 (अब) | 10% (अस्थायी) | सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद नया टैरिफ |
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-US टीम 23 फरवरी से वाशिंगटन में मिलेगी और मार्च में डील साइन होने की उम्मीद है, जो अप्रैल से लागू हो सकती है।
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि भारत के साथ डील अमेरिकी उत्पादों के लिए भारत के बाजार को खोलेगी, जबकि भारत के निर्यातकों को स्थिरता मिलेगी। हालांकि, अस्थायी 10% टैरिफ से कुछ अनिश्चितता बनी हुई है।
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि भारतीय कंपनियां अब सप्लाई चेन डाइवर्सिफाई करें और यूरोप, ASEAN जैसे अन्य बाजारों पर फोकस बढ़ाएं, ताकि अमेरिकी टैरिफ बदलावों का असर कम हो।