“सोने की कीमतें 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंचीं, जबकि चांदी 3.2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पार कर गईं। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, औद्योगिक मांग और केंद्रीय बैंक खरीदारी ने कीमतों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाया। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में कीमतें और बढ़ सकती हैं, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह।”
सोने की कीमतों में आज अभूतपूर्व उछाल देखा गया, जहां MCX पर फरवरी अनुबंध 1,48,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को छूकर 1,50,500 रुपये तक पहुंच गया। यह वृद्धि मुख्य रूप से अमेरिका-यूरोपीय संघ के बीच टैरिफ विवाद और ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते तनाव से प्रेरित है, जिसने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है। केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी, विशेष रूप से चीन और भारत में, ने सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत किया है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर अमेरिकी डॉलर में कमजोरी जारी रही और ब्याज दरें और गिरती रहीं, तो कीमतें 1,60,000 रुपये तक जा सकती हैं।
चांदी की बात करें तो, MCX मार्च अनुबंध 3,09,660 रुपये प्रति किलोग्राम से शुरू होकर 3,20,000 रुपये के पार चला गया, जो औद्योगिक मांग में वृद्धि का परिणाम है। सौर ऊर्जा क्षेत्र में चांदी का उपयोग बढ़ने से, विशेष रूप से भारत की सोलर प्रोजेक्ट्स में, मांग में 35% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव ने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया, जिससे स्टॉक में कमी आई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अगर औद्योगिक उत्पादन में तेजी बनी रही, तो चांदी 3,50,000 रुपये तक पहुंच सकती है।
कीमतों का तुलनात्मक विश्लेषण
| धातु | आज की कीमत (INR) | कल की कीमत (INR) | साप्ताहिक वृद्धि (%) | वार्षिक वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|---|
| सोना (10 ग्राम) | 1,50,500 | 1,42,517 | 5.6 | 64 |
| चांदी (1 किलोग्राम) | 3,20,000 | 3,01,318 | 6.2 | 147 |
यह तालिका दर्शाती है कि सोने में सालाना 64% की वृद्धि हुई, जबकि चांदी ने 147% का रिटर्न दिया, जो मुख्य रूप से आपूर्ति की कमी और मांग के असंतुलन से हुआ।
कीमतों में इस उछाल के प्रमुख कारणों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ फैसलों ने यूरोपीय बाजारों को हिला दिया, जिससे निवेशक सोने की ओर मुड़े। चीन की अर्थव्यवस्था में खुदरा बिक्री और औद्योगिक उत्पादन में गिरावट ने भी सोने को मजबूत किया, क्योंकि निवेशक मुद्रास्फीति से बचाव के लिए इसे चुन रहे हैं। चांदी के मामले में, सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड प्रोडक्ट्स में भारत में तीन गुना वृद्धि देखी गई, जो निवेशकों की रुचि दर्शाती है।
प्रमुख बाजार रुझान
केंद्रीय बैंक खरीदारी : 2026 में औसतन 585 टन सोने की मांग बनी रहेगी, जो कीमतों को ऊपर धकेलेगी।
औद्योगिक मांग : चांदी की मांग सोलर पैनल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में 28% बढ़ी, जो आपूर्ति घाटे को बढ़ावा दे रही है।
भू-राजनीतिक कारक : ग्रीनलैंड विवाद और ईरान तनाव ने स्टॉक में कमी लाई, जिससे स्पॉट मार्केट टाइट हुआ।
निवेशक सलाह : छोटे निवेशक ETF के माध्यम से प्रवेश करें, लेकिन 1,43,500 रुपये पर सोने के लिए सपोर्ट स्तर देखें। चांदी में 2,95,000 रुपये पर मजबूत आधार है।
बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट टैरिफ पर फैसला ट्रंप के पक्ष में नहीं आया, तो कीमतों में अस्थायी गिरावट आ सकती है। हालांकि, लंबी अवधि में, सोने को 5,000 डॉलर प्रति औंस (लगभग 1,55,000 रुपये) तक पहुंचने का अनुमान है। चांदी के लिए, स्पॉट कीमत 100 डॉलर प्रति औंस (लगभग 3,28,000 रुपये) तक जा सकती है, अगर औद्योगिक घाटा बढ़ता रहा।
शहरवार कीमतें
| शहर | सोना (22 कैरेट, 10 ग्राम) | चांदी (1 किलोग्राम) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 1,50,800 | 3,21,500 |
| मुंबई | 1,50,600 | 3,20,800 |
| चेन्नई | 1,51,200 | 3,22,000 |
| कोलकाता | 1,50,900 | 3,21,200 |
| बेंगलुरु | 1,51,000 | 3,21,800 |
ये कीमतें स्थानीय कर और मेकिंग चार्जेस पर निर्भर करती हैं, जो निवेशकों को खरीदारी से पहले जांचने की सलाह दी जाती है।
निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता का है। सोने में प्रतिरोध स्तर 1,46,500 रुपये पर है, जबकि चांदी में 3,21,000-3,28,000 रुपये की रेंज में ट्रेडिंग संभावित है। अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आई, तो कीमतें 15-30% और बढ़ सकती हैं। हालांकि, अगर डॉलर मजबूत हुआ, तो 60-70 डॉलर प्रति औंस तक चांदी गिर सकती है। बाजार विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि पोर्टफोलियो में 10-15% धातुओं का आवंटन रखें, लेकिन जोखिम प्रबंधन पर ध्यान दें।
भविष्य के अनुमान
सोना : Q4 2026 तक 5,055 डॉलर प्रति औंस औसत, जो भारतीय बाजार में 1,60,000 रुपये तक ले जा सकता है।
चांदी : 85-90 डॉलर प्रति औंस तक, भारतीय कीमत 3,50,000 रुपये पार करने की संभावना।
जोखिम : अगर वैश्विक विकास अपेक्षा से अधिक हुआ, तो कीमतें स्थिर रह सकती हैं।
यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहा है, जहां आयात पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, स्टॉक मार्केट में हेज फंड्स सोने को नए एसेट क्लास के रूप में जोड़ रहे हैं, जो कीमतों को सपोर्ट कर रहा है। चांदी की आपूर्ति में कमी, विशेष रूप से माइनिंग में बाधाओं से, घाटा 2026 में और बढ़ सकता है।
Disclaimer: यह सामग्री सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और निवेश सलाह नहीं मानी जानी चाहिए। कीमतें बाजार परिवर्तनों के अधीन हैं और स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित हैं। पाठकों को पेशेवर सलाह लेनी चाहिए।