महाराष्ट्र की लाडकी बहिण योजनाः महिलाओं को लगेगा बड़ा झटका, बजट कटौती की तैयारी; किस्त बढ़ोतरी पर भी ब्रेक

“महाराष्ट्र सरकार की फ्लैगशिप मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना में अब बजट में 20% तक की कटौती हो सकती है। आधार-लिंक्ड ई-केवाईसी और अन्य जांचों से लगभग 60 लाख लाभार्थी हटाए गए हैं, जिससे लाभार्थियों की संख्या 2.43 करोड़ से घटकर करीब 1.8 करोड़ रह गई है। 2026-27 के बजट में आवंटन कम होने की संभावना है और मासिक राशि 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये करने का वादा भी टल सकता है।”

महाराष्ट्र की लाडकी बहिण योजना में बदलाव की तैयारी

महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख महिला सशक्तिकरण योजना ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’ अब वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। राज्य में हाल ही में की गई बड़े पैमाने पर सत्यापन प्रक्रिया ने योजना की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। आधार से जुड़े ई-केवाईसी, इनकम टैक्स डेटाबेस और अन्य क्रॉस-वेरिफिकेशन के जरिए करीब 60 लाख लाभार्थियों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।

पहले योजना के चरम पर 2.43 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हो रही थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 1.8 करोड़ रह गई है। इस गिरावट के कारण देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार 2026-27 के वित्तीय वर्ष के लिए योजना के बजट आवंटन में 20% तक की कमी करने पर विचार कर रही है।

वर्तमान में योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की सम्मान निधि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से दी जाती है। यह राशि 21 से 65 वर्ष की आयु वाली आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए है, जिनकी पारिवारिक आय सीमा के अंतर्गत आती है। लेकिन सत्यापन अभियान के बाद कई जिलों में गड़बड़ियां सामने आईं, जैसे एक ही परिवार से कई दावे, पुरुषों के नाम पर लाभ, सरकारी कर्मचारियों का गलत लाभ लेना और दोहरी योजनाओं का फायदा उठाना।

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जुलाई 2025 में शुरू हुए सत्यापन अभियान में 26.34 लाख खातों को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। दिसंबर 2025 तक लाभार्थी संख्या 1.57 करोड़ तक गिर चुकी थी। जनवरी 2026 में ई-केवाईसी सुधार की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तक बढ़ाई गई, ताकि महिलाएं अपनी गलतियां ठीक कर सकें।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, लाभार्थियों में यह कमी बजट बचत में तब्दील हो सकती है। पिछले वित्तीय वर्ष में योजना पर करीब 36,000 करोड़ रुपये का प्रावधान था। अब 2026-27 में यह राशि कम हो सकती है, जिससे अन्य विभागों पर दबाव कम होगा। योजना पहले से ही राज्य के अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के फंड पर असर डाल रही थी, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना बंद नहीं होगी।

हालांकि, योजना की मासिक राशि बढ़ाने का वादा – जो 2100 रुपये करने की बात पहले से चल रही है – अब आगे टल सकता है। महायुति सरकार ने इसे स्थायी प्रतिबद्धता बताया है, लेकिन वित्तीय तंगी के कारण बढ़ोतरी पर फिलहाल ब्रेक लग सकता है।

लाभार्थियों की संख्या में कमी के प्रमुख कारण:

आधार-लिंक्ड ई-केवाईसी में त्रुटियां (OTP समस्या, गलत जानकारी)

इनकम टैक्स और अन्य डेटाबेस से क्रॉस-चेक में अयोग्य पाए जाना

एक परिवार से एक से अधिक दावे

सरकारी नौकरी वाली महिलाओं का गलत लाभ

अन्य सरकारी योजनाओं से दोहरा फायदा

महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन मुद्दों को दूर करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर सुधार की सुविधा दी है। 31 मार्च 2026 तक महिलाएं अपनी ई-केवाईसी ठीक कर सकती हैं, अन्यथा लाभ बंद हो सकता है।

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योजना की शुरुआत जून 2024 में हुई थी और अगस्त 2024 से पहली किस्त जारी की गई। शुरुआत में 2.6 करोड़ से अधिक आवेदन आए, लेकिन जांच के बाद संख्या स्थिर हुई। अब राज्य बजट 2026-27 में इस योजना का आवंटन लाभार्थियों की वास्तविक संख्या के आधार पर तय होगा।

यह बदलाव महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता में कमी का संकेत दे सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां योजना पर निर्भरता बढ़ गई है। सरकार का फोकस अब योजना को पारदर्शी और टिकाऊ बनाने पर है।

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