पाकिस्तान में आर्थिक संकट गहराने से गरीबी दर 21.9% से बढ़कर 28.9-29% हो गई है, जो 11 साल का उच्चतम स्तर है। आय असमानता में भी तेज इजाफा हुआ है, जहां Gini coefficient 32.7 तक पहुंच गया है, जो 27 साल में सबसे ज्यादा है। ग्रामीण इलाकों में गरीबी 36.2% और शहरी में 17.4% हो गई है, जबकि औसत वास्तविक घरेलू आय में 12% की गिरावट आई है। लगभग 70 मिलियन लोग अब मासिक गरीबी रेखा Rs 8,484 से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।
पाकिस्तान में बढ़ती कंगाली और आय असमानता का गहराता संकट
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर लगातार दबाव पड़ने से गरीबी और आय असमानता दोनों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय गरीबी दर 28.9% तक पहुंच गई है, जो 2018-19 के 21.9% से 32% अधिक है। यह स्तर पिछले 11 वर्षों में सबसे ऊंचा है, जब 2014 में यह 29.5% था।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है, जहां गरीबी दर 28.2% से बढ़कर 36.2% हो गई है। शहरी इलाकों में भी गिरावट आई है, जहां यह 11% से बढ़कर 17.4% पहुंच गई। इस वृद्धि से लगभग 70 मिलियन लोग अब गरीबी रेखा के नीचे हैं, जहां मासिक न्यूनतम व्यय Rs 8,484 निर्धारित है, जो बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी है।
बलूचिस्तान में गरीबी सबसे ज्यादा 47% तक पहुंच गई है, जबकि अन्य प्रांतों में भी वृद्धि देखी गई है। पंजाब और सिंध में गरीबी बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्रीय असमानताएं और गहरी हो गई हैं।
आय असमानता का माप Gini coefficient राष्ट्रीय स्तर पर 28.4 से बढ़कर 32.7 हो गया है, जो 1998 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। प्रांतवार देखें तो सिंध में यह 29.7 से 35.9, पंजाब में 28.4 से 32.0, खैबर पख्तूनख्वा में 24.8 से 29.4 और बलूचिस्तान में 21.0 से 26.5 तक पहुंच गया है। शहरी क्षेत्रों में असमानता में 9% की वृद्धि हुई है, जबकि ग्रामीण में भी तेज इजाफा दर्ज किया गया।
घरेलू आय में भारी गिरावट मुख्य कारणों में से एक है। औसत मासिक वास्तविक घरेलू आय 2019 में Rs 35,454 से घटकर 2024-25 में Rs 31,127 रह गई है, यानी 12% की कमी। मुद्रास्फीति, कमजोर आर्थिक वृद्धि, बेरोजगारी में वृद्धि (7.1%, 21 साल का उच्चतम स्तर) और बार-बार आने वाले झटकों जैसे प्राकृतिक आपदाओं ने परिवारों की क्रय शक्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
| संकेतक | 2018-19 | 2024-25 | परिवर्तन |
|---|---|---|---|
| राष्ट्रीय गरीबी दर | 21.9% | 28.9% | +32% (वृद्धि) |
| ग्रामीण गरीबी दर | 28.2% | 36.2% | +8% अंक |
| शहरी गरीबी दर | 11% | 17.4% | +6.4% अंक |
| Gini coefficient (राष्ट्रीय) | 28.4 | 32.7 | +4.3 अंक |
| औसत वास्तविक मासिक आय | Rs 35,454 | Rs 31,127 | -12% |
| गरीबी रेखा (मासिक) | – | Rs 8,484 | 70 मिलियन प्रभावित |
ये आंकड़े पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक सर्वे (HIES) पर आधारित हैं, जो घरेलू आय और व्यय के वितरण को दर्शाते हैं। उच्च मुद्रास्फीति और कम उत्पादकता वाली नौकरियों ने निचले और मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। ग्रामीण परिवारों पर असर ज्यादा है क्योंकि उनकी आय मुख्यतः कृषि और अनौपचारिक क्षेत्र से आती है, जहां वृद्धि रुकी हुई है।
प्रांतों में असमानता की वृद्धि से पता चलता है कि आर्थिक नीतियां उच्च आय वर्ग को ज्यादा फायदा पहुंचा रही हैं, जबकि निचले तबके पीछे छूट रहे हैं। बेरोजगारी 5.7% से बढ़कर 7.1% हो गई है, जो युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों में कमी दर्शाती है।
यह स्थिति पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है, जहां गरीबी में वृद्धि से सामाजिक अस्थिरता और स्वास्थ्य-शिक्षा जैसे क्षेत्रों में और गिरावट आ सकती है।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध आंकड़ों और रिपोर्ट्स पर आधारित है।