“केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन मिला, जो FY 2025-26 के बजटीय अनुमान से 15.19% अधिक है, लेकिन रक्षा कंपनियों के शेयरों में 5-14% तक गिरावट दर्ज हुई क्योंकि कोई बड़े नीतिगत बदलाव या प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक घोषणाएं नहीं हुईं। ब्रोकरेज फर्मों जैसे Nomura और Goldman Sachs ने कैपेक्स वृद्धि को उम्मीद से कम बताते हुए बाजार की निराशा को वजह माना, साथ ही STT बढ़ोतरी से व्यापक मार्केट सेंटीमेंट प्रभावित हुआ।”
केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र को अब तक का सबसे बड़ा आवंटन दिया गया है। कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये की राशि मंत्रालय को मिली, जिसमें कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं। यह पिछले वर्ष के 1.80 लाख करोड़ रुपये से 21.84% अधिक है। रेवेन्यू हेड के तहत 3.65 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जो ऑपरेशनल जरूरतों और सैलरी के लिए इस्तेमाल होगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कैपिटल एक्विजिशन के लिए 1.85 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो नेक्स्ट-जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट, ड्रोन्स, यूएवी, स्मार्ट वेपन्स और स्पेशलिस्ट व्हीकल्स की खरीद पर फोकस करेगा। FY 2025-26 में अब तक 2.10 लाख करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स साइन हो चुके हैं और 3.50 लाख करोड़ रुपये के लिए AoN अप्रूवल दिया गया है। कुल बजट का 27.95% कैपिटल पर, 20.17% सस्टेनेंस पर और 26.40% पे एंड अलाउंस पर खर्च होगा।
फिर भी, बजट ऐलान के बाद रक्षा सेक्टर के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। Nifty India Defence इंडेक्स 9% तक गिरा, जबकि Bharat Dynamics के शेयर 10.41% नीचे आए। HAL, BEL, Mazagon Dock Shipbuilders, Garden Reach Shipbuilders, Paras Defence और Data Patterns जैसे स्टॉक्स 5-14% तक लुढ़के। बाजार में यह गिरावट STT रेट्स में बढ़ोतरी से शुरू हुई, जो F&O ट्रेडिंग पर लागू हुई, लेकिन रक्षा सेक्टर पर इसका असर और गहरा पड़ा।
ब्रोकरेज फर्मों ने इस गिरावट की मुख्य वजह बताई है बजट में ‘बिग बैंग’ मेजर्स की कमी। Nomura ने कहा कि कैपेक्स में वृद्धि पॉजिटिव है, लेकिन कोई ट्रांसफॉर्मेटिव पॉलिसी ऐलान नहीं होने से मार्केट निराश हुआ। Goldman Sachs ने नोट किया कि कुल बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये उनके अनुमान 7.75 लाख करोड़ से ऊपर है, लेकिन ‘अदर इक्विपमेंट’ कैटेगरी में 62% वृद्धि (82,200 करोड़ रुपये) के बावजूद, सेक्टर की रैली पहले ही हाई वैल्यूएशंस पर पहुंच चुकी थी। CLSA ने FY27 में स्पेंडिंग ग्रोथ के मॉडरेट होने की चेतावनी दी, क्योंकि FY26 का रिवाइज्ड कैपेक्स 2.2 लाख करोड़ रुपये का हाई बेस बन गया है।
रक्षा बजट का ब्रेकडाउन:
| हेड | आवंटन (लाख करोड़ रुपये में) | पिछले वर्ष से % वृद्धि | मुख्य फोकस |
|---|---|---|---|
| कैपिटल एक्सपेंडिचर | 2.19 | 21.84 | आधुनिकीकरण, कैपिटल एक्विजिशन |
| कैपिटल एक्विजिशन | 1.85 | 24 | नेक्स्ट-जेन एयरक्राफ्ट, ड्रोन्स, यूएवी |
| रेवेन्यू एक्सपेंडिचर | 3.65 | 17.24 | ऑपरेशनल स्टोर्स, स्पेयर्स, मेंटेनेंस |
| पे एंड अलाउंस | 1.58 | – | सैलरी और भत्ते |
| डिफेंस पेंशंस | 1.72 | – | पूर्व सैनिकों का कल्याण |
| सिविल ऑर्गेनाइजेशंस | 0.29 | – | R&D और इंफ्रा |
यह आवंटन GDP का 2% है और केंद्रीय व्यय का 14.67%। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे ‘सुरक्षा-विकास-आत्मनिर्भरता’ का बैलेंस बताया, खासकर Operation Sindoor के बाद। लेकिन ब्रोकरेजेस का मानना है कि घरेलू प्रोक्योरमेंट पर 75% फोकस के बावजूद, बड़े प्लेटफॉर्म ऑर्डर्स की स्पीड धीमी रह सकती है। ICICI Securities ने कहा कि ‘अदर इक्विपमेंट’ में वृद्धि मिसाइल्स, रडार्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए पॉजिटिव है, जो Solar Industries, BEL और Bharat Dynamics जैसी कंपनियों को फायदा देगी।
शेयर गिरावट के प्रमुख कारण (ब्रोकरेज व्यूज से):
पॉलिसी वैक्यूम: Citi ने कहा कि बजट में कोई प्रोजेक्ट-लिंक्ड ऐलान नहीं होने से ऑर्डर इनफ्लो पर अनिश्चितता बनी। मार्केट को 30% तक कैपेक्स हाइक की उम्मीद थी, लेकिन 18% वृद्धि कम पड़ी।
हाई वैल्यूएशंस: सेक्टर स्टॉक्स पहले ही 2025 में 100-200% ऊपर थे, इसलिए बजट ट्रिगर की कमी से प्रॉफिट बुकिंग हुई।
मार्केट-वाइड प्रेशर: STT में बढ़ोतरी से F&O वॉल्यूम प्रभावित हुआ, जो रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट पैदा कर रक्षा स्टॉक्स को हिट किया।
मॉडरेट ग्रोथ आउटलुक: Jefferies ने HAL, L&T और BEML को टॉप पिक्स बताया, लेकिन FY29 तक 3 लाख करोड़ रुपये के टारगेट स्पेंड को देखते हुए शॉर्ट-टर्म अपसाइड लिमिटेड माना।
पॉजिटिव सरप्राइजेज: Goldman Sachs ने ‘अदर इक्विपमेंट’ में 62% जंप को हाइलाइट किया, जो मिसाइल्स और रडार्स पर फोकस दिखाता है। R&D के लिए 3.93% फंडिंग आत्मनिर्भर भारत को बूस्ट देगी।
बजट में MRO पार्ट्स के इंपोर्ट पर BCD एग्जेम्प्शन और R&D के लिए 172.5 अरब रुपये का आवंटन इंडस्ट्री को लॉन्ग-टर्म सपोर्ट देगा। लेकिन ब्रोकरेजेस का कहना है कि सेक्टर की रिकवरी ऑर्डर क्लोजर्स की स्पीड पर निर्भर करेगी। FY26 में इंडिजिनस प्रोडक्शन 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो 2014-15 से 174% अधिक है।
सेक्टर के लिए प्रमुख ऐलोकेशंस और इंपैक्ट:
एयरोस्पेस और नेवल फ्लीट: कैपिटल आउटले में बढ़ोतरी से HAL और Mazagon Dock को फायदा, लेकिन कोई स्पेसिफिक ऑर्डर ऐलान नहीं।
R&D और इनोवेशन: DRDO को 26,816 करोड़ रुपये, जो पिछले वर्ष से 12.4% अधिक। प्राइवेट सेक्टर पार्टिसिपेशन पर फोकस।
इंडिजिनाइजेशन: 82.6% कैपिटल आउटले डोमेस्टिक प्रोक्योरमेंट के लिए, जो BEL और BEML जैसी कंपनियों के ऑर्डर बुक को मजबूत करेगा।
एक्सपोर्ट पोटेंशियल: इंडिया के डिफेंस एक्सपोर्ट्स में रडार्स, टॉरपीडोज और हेलिकॉप्टर्स शामिल, जो ग्लोबल मार्केट में पोजिशन मजबूत करेंगे।
ब्रोकरेजेस ने चेतावनी दी कि FY27 में कैपेक्स ग्रोथ 5.2% तक मॉडरेट हो सकती है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में सेक्टर की ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहेगी। Motilal Oswal ने Solar Industries और GRSE को पोटेंशियल बेनिफिशियरीज बताया। कुल मिलाकर, बजट स्ट्रैटेजिक इंपेरेटिव्स पर फोकस्ड है, लेकिन मार्केट रिएक्शन शॉर्ट-टर्म डिसअपॉइंटमेंट दिखाता है।
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