“केंद्रीय बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) को फ्यूचर्स पर 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से 0.15% करने का ऐलान किया गया है। इसका उद्देश्य डेरिवेटिव्स मार्केट में अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकना, सिस्टेमिक रिस्क को कम करना और छोटे निवेशकों को नुकसान से बचाना है। बाजार में गिरावट आई, लेकिन लंबी अवधि में यह स्थिरता लाएगा।”
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में STT बढ़ोतरी के पीछे की वजह स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में बढ़ती सट्टेबाजी छोटे निवेशकों के लिए जोखिम पैदा कर रही है। सरकार का मकसद अत्यधिक स्पेकुलेशन को हतोत्साहित करना है, न कि ट्रेडिंग को पूरी तरह रोकना। इससे सिस्टेमिक रिस्क कम होगा और मार्केट में ज्यादा स्थिरता आएगी।
STT क्या है? सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स एक प्रकार का डायरेक्ट टैक्स है जो स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर, फ्यूचर्स और ऑप्शंस की खरीद-बिक्री पर लगता है। यह टैक्स सरकार की आय का स्रोत है और ट्रेडिंग की लागत बढ़ाकर अनावश्यक सट्टेबाजी को नियंत्रित करता है। पहले यह टैक्स इक्विटी, डेरिवेटिव्स और अन्य सिक्योरिटीज पर अलग-अलग दरों से लगता था, लेकिन अब F&O पर फोकस है।
बजट में क्या बदलाव हुए? फ्यूचर्स पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है, जो 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। ऑप्शंस प्रीमियम पर यह 0.1 प्रतिशत से 0.15 प्रतिशत हो गया है, यानी 50 प्रतिशत बढ़ा। ऑप्शंस एक्सरसाइज पर भी 0.125 प्रतिशत से 0.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। ये बदलाव 1 अप्रैल से लागू होंगे और FY 2026-27 की ट्रेड्स पर असर डालेंगे।
| ट्रेड प्रकार | पुरानी STT दर | नई STT दर | प्रतिशत बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| फ्यूचर्स ट्रेडिंग | 0.02% | 0.05% | 150% |
| ऑप्शंस प्रीमियम | 0.10% | 0.15% | 50% |
| ऑप्शंस एक्सरसाइज | 0.125% | 0.15% | 20% |
ये बदलाव क्यों? वित्त मंत्री ने बताया कि F&O मार्केट में हाई टर्नओवर और लीवरेज्ड पोजीशंस से सिस्टेमिक रिस्क बढ़ रहा है। छोटे निवेशक अक्सर बड़े नुकसान उठाते हैं क्योंकि वे स्पेकुलेशन में फंस जाते हैं। सरकार का लक्ष्य फंडामेंटल्स बेस्ड इन्वेस्टमेंट को प्रोत्साहित करना है, न कि शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग को। रेवेन्यू सेक्रेटरी ने भी कहा कि यह बढ़ोतरी स्पेकुलेटिव टेंडेंसीज को रोकने के लिए है और डेरिवेटिव्स मार्केट में रिस्क मैनेजमेंट को मजबूत करेगी। पिछले सालों में F&O वॉल्यूम में 500 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है, जो अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकती है।
मार्केट पर क्या असर पड़ा? बजट ऐलान के बाद सेंसेक्स 1,843 पॉइंट्स गिरकर 80,722.94 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 593 पॉइंट्स गिरकर 24,825.45 पर पहुंचा। यह लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट है। ब्रोकरेज स्टॉक्स जैसे एंजेल वन, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में 8-12 प्रतिशत तक गिरावट आई। निवेशकों में ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ने का डर है, खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि लॉन्ग-टर्म में यह मार्केट को ज्यादा成熟 बना सकता है।
ट्रेडर्स के लिए क्या मतलब? अगर आप F&O में सक्रिय हैं, तो हर ट्रेड की लागत बढ़ जाएगी। उदाहरण के लिए, 1 लाख रुपये के फ्यूचर्स ट्रेड पर पहले 20 रुपये STT लगता था, अब 50 रुपये लगेगा। ऑप्शंस में भी इसी तरह बढ़ोतरी होगी। छोटे निवेशकों को सलाह है कि स्पेकुलेशन से बचें और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट पर फोकस करें। ब्रोकरेज हाउस अब ज्यादा सतर्कता बरतेंगे और क्लाइंट्स को रिस्क के बारे में शिक्षित करेंगे।
सरकार की व्यापक रणनीति: यह कदम टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और कंप्लायंस बढ़ाने का हिस्सा है। बजट में कैपिटल गेंस टैक्स में भी बदलाव हुए हैं, जैसे बायबैक प्रोसीड्स पर कैपिटल गेंस टैक्स लगाना। इससे कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर 22 प्रतिशत और नॉन-कॉरपोरेट पर 30 प्रतिशत टैक्स लग सकता है। कुल मिलाकर, सरकार का फोकस स्पेकुलेशन को कम करके स्थिर विकास पर है।
विशेषज्ञों की राय: कई एनालिस्ट्स ने कहा कि यह बढ़ोतरी मामूली है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर STT दरें इससे ज्यादा हैं। लेकिन भारत में F&O वॉल्यूम दुनिया में सबसे ज्यादा है, इसलिए यह जरूरी था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में F&O ट्रेड्स से छोटे निवेशकों को औसतन 50,000 रुपये का नुकसान हुआ। सरकार अब SEBI के साथ मिलकर और रेगुलेशंस ला सकती है, जैसे मार्जिन रिक्वायरमेंट्स बढ़ाना।
निवेशकों के लिए टिप्स:
स्पेकुलेशन से बचें: F&O में लीवरेज का इस्तेमाल सावधानी से करें।
डाइवर्सिफाई करें: इक्विटी, म्यूचुअल फंड्स और बॉन्ड्स में बैलेंस बनाएं।
टैक्स कैलकुलेटर इस्तेमाल करें: नई दरों के साथ अपनी लागत चेक करें।
एक्सपर्ट एडवाइस लें: ब्रोकर या फाइनेंशियल एडवाइजर से बात करें।
लॉन्ग-टर्म फोकस: शॉर्ट-टर्म ट्रेड्स की बजाय वैल्यू इन्वेस्टिंग अपनाएं।
यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार को ज्यादा मजबूत और रिस्क-फ्री बनाने की दिशा में एक कदम है। ट्रेडर्स को अब अपनी स्ट्रैटेजी रिव्यू करनी होगी, ताकि बढ़ी हुई लागत से निपटा जा सके। सरकार का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था में ज्यादा स्थिरता आएगी और निवेशक सुरक्षित रहेंगे।
मुख्य पॉइंट्स:
STT बढ़ोतरी स्पेकुलेशन को रोकने के लिए।
छोटे निवेशकों की सुरक्षा प्राथमिकता।
मार्केट में तत्काल गिरावट, लेकिन लॉन्ग-टर्म फायदेमंद।
नई दरें 1 अप्रैल से लागू।
F&O वॉल्यूम पर नजर रखें।
| निवेशक प्रकार | संभावित प्रभाव |
|---|---|
| छोटे ट्रेडर्स | लागत बढ़ने से ट्रेड्स कम होंगे, नुकसान से बचाव। |
| हाई-वॉल्यूम ट्रेडर्स | प्रॉफिट मार्जिन घटेगा, स्ट्रैटेजी बदलनी होगी। |
| लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स | कम प्रभाव, क्योंकि F&O कम इस्तेमाल। |
| ब्रोकरेज फर्म्स | वॉल्यूम घटने से रेवेन्यू प्रभावित, लेकिन रेगुलेशन बेहतर। |
अंत में, यह फैसला बाजार की सेहत के लिए लिया गया है, जो आने वाले महीनों में अपना असर दिखाएगा। निवेशक अब ज्यादा सतर्क रहें और सूचित निर्णय लें।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट सूत्रों पर आधारित है। निवेश संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।